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Video : सीएम भूपेश को किसानों ने दिया जीराफूल चावल और लीची तो कंधे पर यूं उठाया, साथ खड़े मंत्रियों-विधायकों ने लगाए ठहाके

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सरगुजा प्रवास के दौरान सीएम भूपेश बघेल ने 301 ग्रामीणों को किया वन अधिकार मान्यता पत्र का वितरण, सरगुजा विकास प्राधिकरण की बैठक में हुए शामिल…..

राजन सिंह चौहान

अंबिकापुर/ सीएम भूपेश बघेल सोमवार को सरगुजा दौरे पर हैं। उन्होंने अंबिकापुर के सर्किट हाउस में 301 हितग्राहियों को वन अधिकार मान्यता पत्र का वितरण किया। इस दौरान उन्होंने पूर्व की भाजपा सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि जंगल में लंबे समय से काबिज लोगों की भूमि का पट्टा नहीं बना, यह उनका दोष नहीं बल्कि उस सरकार की विफलता थी।

पट्टा वितरण के बाद ग्रामीणों ने सीएम को जीराफूल चावल और लीची भेंट किया। बहंगी के दोनों छोर पर बंधे चावल और लीची को सीएम ने कंधे पर उठाया। इस दौरान उनके साथ मंच पर रहे स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव, शिक्षामंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम, सरगुजा विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष खेलसाय सिंह, विधायक अमरजीत भगत, प्रीतम राम, चिंतामणी महाराज व अन्य ने ठहाके लगाए।

अंबिकापुर के सर्किट हाउस में आयोजित वन अधिकार मान्यता पत्र वितरण कार्यक्रम में सीएम भूपेश बघेल पूर्व की भाजपा सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि जंगल मे वर्षों से रहने वाले लोग जिन्होंने पट्टा नही बनवाया, यह उनका दोष नही है। यह पूर्व की सरकार की विफलता है।

उन्होंने कहा कि वन अधिकार पत्र कब्जाधारियों का अधिकार है। कानून बन जाने के बावजूद पूर्व की भाजपा सरकार ने कब्जाधारियों के साथ अन्याय किया है। सही तरीके से दावा-पत्रों का परीक्षण नही किया। आधा-अधूरा वन अधिकार पत्र वितरित किया। सामुदायिक वन अधिकार पत्र किसी भी गांव में नही दिया।

शासकीय प्रयोजन के लिए ली गई जमीन को ही सामुदायिक वन अधिकार पत्र मान लिया गया, जबकि प्रावधान है कि यदि किसी जंगल में दो-तीन गांव के लोग आश्रित है तो उन सभी गांव के लोगों का अधिकार उस जंगल पर होगा।

हमे खुशी है कि आज यहां सामुदायिक वन अधिकार पत्र के साथ गैर आदिवासियों को भी काबिज जमीन का पट्टा दिया गया है। उन्होंने जमीन का अच्छे तरीके से उपयोग करने ग्रामीणों को प्रेरित कर उनकी खुशहाली व उन्नति की कामना की।

13 साल से काबिज लोगों को मिला पट्टा
सीएम भूपेश ने कहा कि पूर्व की सरकार ने ग्राम एवं जिला स्तर पर समितियां नहीं बनाईं इस कारण वन अधिकार पट्टा वितरित नहीं किया गया।

उन्होंने कहा कि 13 दिसंबर 2005 से पहले के वन भूमि कब्जाधारियों को वन अधिकार मान्यता प्रमाण पत्र दिया जा रहा है। इस तारीख के बाद के लोगों को इसका लाभ नहीं मिलेगा। इस दौरान उन्होंने 301 लोगों को वन अधिकार मान्यता पत्र का वितरण किया।